बजट 2019

तमिलनाडु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध क्यों होता है?

पिछले क़रीब एक साल से जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु का दौरा किया, लगभग हर बार “गोबैक मोदी” जैसे हैशटेग सोशल मीडिया में ट्रेंड करने शुरू हो गए.

इस कारण सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या नरेंद्र मोदी को तमिलनाडु में पसंद नहीं किया जाता और अगर नहीं तो क्यों?

कुछ विश्लेषक तो यहां तक दावा करते हैं कि नरेंद्र मोदी जितने अलोकप्रिय तमिलनाडु में हैं, शायद ही किसी और राज्य में होंगे.

स्थानीय पत्रकारों की मानें तो ये हैशटैग्स अप्रेल 2012 में सबसे पहले दिखे. नरेंद्र मोदी राज्य में डिफेंस एक्सपो के उद्घाटन के लिए आए थे और विपक्षी दलों ने कावेरी जल प्रबंधन प्रधिकरण में केंद्र सरकार की कथित देरी के ख़िलाफ़ काले झंडे लहराए थे. इस देरी को कर्नाटक चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा था.

उसके बाद नरेंद्र मोदी ने कई बार तमिलनाडु का दौरा किया है और लगभग हर बार सोशल मीडिया पर ऐसे ही ट्रेंड्स दिखे हैं.

तमिलनाडु में भाजपा बहुत मज़बूत तो नहीं पर पार्टी समर्थकों ने जवाब में ‘तमिलनाडु वेलकम्स मोदी’ जैसे हैशटैग्स चलाए.

अमरीकी थिंकटैंक एटलांटिक काउंसिल की डिजिटल फोरेंसिक लैब ने पाया कि दोनो पक्षों के हैशटैग्स के ट्रेंड होने में बॉट्स या फ़ेक अकाउंट्स का भी हाथ था.

विरोध क्यों?

‘गोबैक मोदी’ जैसे हैशटैग्स को ट्रेंड करानेवालों में चेन्नई की सोनिया अरुण कुमार प्रमुख हैं.

सोनिया अरुणकुमार के ट्विटर पन्ने पर जाते ही श्रीलंका के चरमपंथी गुट एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरन की तस्वीर नज़र आती है, जिन्हें वो “प्यार” करती हैं.

सोनिया कहती हैं, “हम उन्हें (नरेंद्र मोदी को) ऐसे प्रधानमंत्री की तरह देखते हैं जो विदेश चले जाते हैं, जिन्हें देश की असली समस्याओं से सरोकार नहीं है, जो ग़रीबों के साथ नहीं हैं. और जो हिंदुत्व गुटों के लिए काम करते हों.”

सोनिया नोटबंदी, रफ़ाल, बीफ़ पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर ट्वीट करती हैं.

ऐसे हैशटैग्स को ट्रेंड करवाने वाले लोगों में डीएमके कार्यकर्ता, सोशल ऐक्टिविस्ट के अलावा आम लोग भी होते हैं.

केंद्रीय चेन्नई की भीषण गर्मी से बचने के लिए हम एक पार्क में पहुंचे जहां उन्होंने मुझे बताया, “हमारा मक़सद है लोगों का, उत्तर भारतीयों का, अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचना और लोगों तक मुद्दों की सच्चाई को पहुंचाना.”

नाराज़गी के कारण

तमिलनाडु में नरेंद्र मोदी से नाराज़गी के कई कारण गिनाए जाते हैं.

जब तमिलनाडु के किसान दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे थे तब वो उनसे मिलने क्यों नहीं गए, वो तमिलनाडु पर कथित तौर पर उत्तर भारतीयता और हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान की सोच थोपना चाहते हैं, उन्होंने गजा तूफ़ान से प्रभावित लोगों की कथित तौर पर सुध नहीं ली, उनकी सरकार तमिलनाडु पर कई सौ करोड़ की लागत से बनने वाले न्यूट्रीनो प्रोजेक्ट को लादना चाहती है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक़ इस न्यूट्रीनो प्रोजेक्ट का मक़सद है पार्टिकल फ़िजिक्स में रिसर्च को आगे बढ़ाना, लेकिन कुछ स्थानी लोगों को डर है कि इससे इलाक़े की बायोडाइवर्सिटी या जैव-विविधता के अलावा आम लोगों को नुक़सान पहुंच सकता है.

भारतीय जनता पार्टी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति के मुताबिक़ ऐसे आरोप इसलिए सामने आ रहे हैं क्योंकि नोटबंदी से तमिलनाडु के भ्रष्ट लोग तिलमिलाए हुए हैं.

वो पूछते हैं कि जब किसानों का ऋण माफ़ करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी थी तो उन्हें दिल्ली जाकर प्रदर्शन करने की क्या ज़रूरत थी.

तिरुपति का आरोप है कि विरोधी तमिलनाडु सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं और “मैं गर्व से कहता हूं कि मैं एक तमिल हूं और एक भारतीय भी.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *